अक्षर धाम मंदिर जोधपुर का उद्धघाटन 25सितंबर को, भाजपा अध्यक्ष राठौड़ ने किया पोस्टर का विमोचन
अक्षर धाम मंदिर जोधपुर का उद्धघाटन 25सितंबर को, भाजपा अध्यक्ष राठौड़ ने किया पोस्टर का विमोचन
पाली/ राजस्थान में दूसरा अक्षरधाम मंदिर जोधपुर शहर में बन रहा है। जिसका निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और 25 सितम्बर को भव्य रूप से मंदिर का उद्घाटन होगा।
मंदिर की संस्था से जुड़े जोधपुर के पूर्व महापौर रामेश्वर दाधिच रविवार को पाली में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को आमंत्रण देने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मंदिर के पोस्टर और बुकलेट का भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के हाथों विमोचन करवाया। मंदिर के बारे में बताते हुए जोधपुर के पूर्व महापौर रामेश्वर दाधिच ने कहा कि प्रदेश में पहला अक्षरधाम मंदिर जयपुर के वैशाली नगर में स्थित है। जोधपुर शहर का अक्षरधाम मंदिर अपने अंतिम चरण में है। सूरसागर क्षेत्र में काली बेरी के पास पहाड़ी पर बोचासनवासी श्री अक्षरधाम पुरुषोत्तम स्वामी नारायण संस्था इस मंदिर का निर्माण करा रही है। इस विशाल मंदिर का उद्घाटन 25 सितंबर को संस्था के प्रमुख महंत स्वामी करेंगे।इस भवन में ऐसी व्यवस्था की गई है कि 1 लाख लोग एक साथ बैठकर भोजन कर सकते है। दो बड़े सभागार बनाए गए है। जहां एक हॉल में 3 हजार आदमी कुर्सियों पर आराम से बैठ सकते है। 25 सितम्बर को उद्घाटन है, जिसमें 4 से 5 लाख लोगों के आने की संभावनाओं को देखते हुए व्यवस्था की जाएगी.इस मंदिर का निर्माण करीब 42 बीघा में हुआ है। 10 बीघा क्षेत्र में मुख्य मंदिर स्थित है। इस परिसर का आधार भूमि से 13 फीट ऊंचा है। इस अक्षरधाम मंदिर के चारों ओर की दीवारें जोधपुरी छीतर पत्थर की बनाई गई है। जिस पर सुंदर और बारीक नक्काशी की गई है। नगर निगम ने 46 बीघा जमीन दी थी। इसका निर्माण 8 साल पहले शुरू किया गया था। रोजाना 350 कारीगर काम करते थे। पूरे निर्माण में जोधपुरी पत्थर काम में लिया गया है।
अक्षरधाम मंदिर का निर्माण नागराड़ी शैली के अनुसार किया जा रहा है। साथ ही, इसमें मारू-गुर्जर वास्तुकला का समावेश किया गया है। मंदिर की तीसरी मंजिल रणकपुर शैली में बनी है। निचली मंजिल में लिंकर्णी भगवान की मूर्ति स्थापित की जाएगी। गर्भगृह की छत पर कोई स्तंभ नहीं है।
इस मंदिर में कुल 281 गोलाकार स्तंभ हैं। प्रत्येक स्तंभ अलग-अलग आकार और डिजाइन का है। आश्चर्यजनक बात यह है कि अन्य अक्षरधाम मंदिरों के स्तंभ वर्गाकार होते हैं, लेकिन इस मंदिर में इन्हें सिरोही घाट शैली के अनुसार गोलाकार बनाया गया है। ये स्तंभ नीचे से चौड़े और ऊपर से संकरे हैं। मंदिर की कुल लंबाई 181 फीट और ऊंचाई 91 फीट है।